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कृषि से ग्रामीण क्षेत्र का आर्थिक विकासः एक अध्ययन

डॉ. प्रिंस कुमार, पी-एच डी, राजनीति विज्ञान विभाग, बी एन एम यू, मधेपुरा, बिहार DOI: 10.64127/Shodhpith.2025v1i50010 DOI URL: https://doi.org/10.64127/10.64127/Shodhpith.2025v1i50010
Published Date: 04-09-2025 Issue: Vol. 1 No. 4 (2025): september - October 2025 Published Paper : Download

सारांश- यह अध्ययन भारत के ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि के आर्थिक विकास पर प्रभाव का विश्लेषण करता है, विशेष रूप से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने में इसकी भूमिका पर केंद्रित है। अध्ययन का उद्देश्य कृषि उत्पादकता, ग्रामीण रोजगार, आय वितरण, और सामाजिक-आर्थिक कल्याण के बीच संबंधों की जांच करना है। शोध में मिश्रित पद्धति का उपयोग किया गया, जिसमें उत्तर प्रदेश और बिहार के चार ग्रामीण जिलों से एकत्रित प्राथमिक और द्वितीयक डेटा शामिल हैं। प्राथमिक डेटा के लिए 500 किसानों के साथ साक्षात्कार और सर्वेक्षण आयोजित किए गए, जबकि द्वितीयक डेटा सरकारी रिपोर्टों और साहित्य समीक्षा से प्राप्त किया गया। निष्कर्षों से पता चलता है कि आधुनिक कृषि तकनीकों, जैसे ड्रिप सिंचाई और जैविक खेती, ने उत्पादकता में 20-30ः की वृद्धि की, जिससे ग्रामीण परिवारों की आय में औसतन 15ः की वृद्धि हुई। इसके अतिरिक्त, कृषि-आधारित उद्यमों और सहकारी समितियों ने ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसरों को बढ़ाया, विशेष रूप से महिलाओं और युवाओं के लिए। हालांकि, चुनौतियाँ जैसे जलवायु परिवर्तन, भूमि विखंडन, और बाजार तक पहुंच की कमी अभी भी ग्रामीण आर्थिक विकास को बाधित करती हैं। अध्ययन नीति निर्माताओं के लिए सुझाव देता है कि ग्रामीण बुनियादी ढांचे में निवेश, किसानों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम, और बाजार लिंकेज को मजबूत करने से कृषि की विकास क्षमता को और बढ़ाया जा सकता है। यह अध्ययन ग्रामीण भारत में सतत आर्थिक विकास के लिए कृषि की केंद्रीय भूमिका को रेखांकित करता है और समावेशी विकास के लिए नीतिगत हस्तक्षेपों की आवश्यकता पर बल देता है।

मुख्य शब्द: कृषि, ग्रामीण विकास, आर्थिक विकास, उत्पादकता, रोजगार, सतत विकास.


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