Call & WhatsApp: +91 94585 04123 E-mail ID: editor@shodhpith.com



साहित्यिक पत्रकारिता का डिजिटल रूपांतरण और पत्रिकाओं का भविष्य

रुचि पालीवाल, शोधार्थी, जनार्दन राय नागर राजस्थान विद्यापीठ विश्वविद्यालय, उदयपुर (राज.), भारत DOI: 10.64127/Shodhpith.2025v1i50014 DOI URL: https://doi.org/10.64127/10.64127/Shodhpith.2025v1i50014
Published Date: 04-09-2025 Issue: Vol. 1 No. 4 (2025): september - October 2025 Published Paper : Download

सारांश- साहित्यिक पत्रकारिता की अंतरात्मा मानवीय संस्कृति और वैचारिक चेतना के विकास से अनुप्राणित है। ऐतिहासिक रूप से पंडित जुगलकिशोर शुक्ल द्वारा संपादित श्उदन्त मार्तण्डश् (1826) से पल्लवित होकर, आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी के सरस्वती (1900) के भाषा-परिमार्जन और मुंशी प्रेमचंद के श्हंसश् (1930) के वैचारिक विमर्श तक, पत्रिकाओं ने सदैव समाज के बौद्धिक अधिष्ठान को निर्मित करने में महती भूमिका निभाई है। वर्तमान सूचना-तकनीकी युग में साहित्य और पत्रकारिता का यह अंतः संबंध एक क्रांतिकारी डिजिटल रूपांतरण के दौर से गुजर रहा है, जहाँ मुद्रित माध्यमों की पारंपरिक संरचना और डिजिटल मीडिया का वैश्विक विस्तार परस्पर संवाद कर रहे हैं। यह रूपांतरण केवल माध्यम का परिवर्तन नहीं, अपितु साहित्यिक मूल्यों, संपादकीय नैतिकता और पाठकीय ग्रहणशीलता का एक नवीन विन्यास है। मुद्रित से डिजिटल की ओर संक्रमण की इस प्रक्रिया में ई-पत्रिकाओं‘, ‘वेब-जर्नल्स‘, श्साहित्यिक ब्लॉग और ‘ऑडियो-विजुअल‘ माध्यमों (पॉडकास्ट) ने अभिव्यक्ति के स्वरूप को पूर्णतः परिवर्तित कर दिया है। डिजिटल माध्यमों ने जहाँ एक ओर वैश्विक पाठक-वर्ग तक निर्बाध पहुँच, त्वरित प्रकाशन और लागत में न्यूनता जैसे ऐतिहासिक अवसर प्रदान किए हैं, वहीं दूसरी ओर डिजिटल विभाजन और गुणवत्ता बनाम लोकप्रियता का एक द्वंद्वात्मक परिदृश्य भी निर्मित किया है। वर्तमान दौर का पाठक मात्र सूचनाग्राही नहीं है; उसकी बदलती प्रवृत्तियाँ और बहुभाषिकता पाठक-लेखक संवाद की एक संवादात्मक संरचना की माँग करती हैं। इस तकनीकी हस्तक्षेप के मध्य डॉ. नामवर सिंह जैसे विचारकों द्वारा रेखांकित संपादकीय विवेक और श्एल्गोरिदमश् के बीच का संतुलन सबसे बड़ी चुनौती बनकर उभरा है, जहाँ मौलिकता, तथ्यपरकता और बौद्धिक संपदा के संरक्षण हेतु नवीन मानकों का निर्धारण अनिवार्य हो गया है। विशेष रूप से भारतीय संदर्भ में, यह रूपांतरण स्त्री, दलित एवं वंचित स्वरों के सशक्तिकरण और क्षेत्रीय साहित्य की वैश्विक व्याप्ति का आधार बना है। भविष्य की साहित्यिक पत्रकारिता एक हाइब्रिड मॉडल (मुद्रित$डिजिटल) की ओर अग्रसर है, जिसमें समुदाय-आधारित सदस्यता और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (।प्) जैसे नवाचारों का समावेश सतत विकास की संभावनाओं को पुष्ट करता है। शोध की वर्णनात्मक एवं विश्लेषणात्मक प्रविधि यह स्पष्ट करती है कि डिजिटल चुनौतियाँकृजैसे आर्थिक स्थायित्व और तकनीकी असमानताकृके बावजूद, साहित्यिक पत्रकारिता का भविष्य अपनी अनुकूलन क्षमता और मानवीय संवेदनाओं के संरक्षण में ही निहित है। अंततः, यह विवेचन साहित्यिक पत्रकारिता के गौरवशाली अतीत, संघर्षपूर्ण वर्तमान और संभावनाशील भविष्य के मध्य एक संतुलित और तार्किक सेतु निर्मित करता है।

मुख्य शब्द: साहित्यिक पत्रकारिता, डिजिटल रूपांतरण, ई-पत्रिका, पाठकीय संस्कृति, हाइब्रिड मॉडल, संपादकीय विवेक, वैचारिक अधिष्ठान, बौद्धिक संपदा।


Call: 9458504123 Email: editor@researchvidyapith.com